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Sunday, December 28, 2025

Realization and Revelation.

A Few Minutes Ago.

(AT 02:45).

जब मुझे ईश्वर का साक्षात्कार हुआ!

उससे पहले तक मैं नहीं जानता था कि मैं कौन हूँ और ईश्वर कौन है। ईश्वर का साक्षात्कार होने से पहले मुझे यह तो पता था कि मैं हूँ और ईश्वर मुुझे अपनी कल्पना में ज्ञात एक संभावना जान पड़ता था। ऐसी संभावना और सत्यता भर जिसमें मैं, मेरा संसार और मेरा समय मेरे लिए पुुनः पुनः अभिव्यक्त और विलुप्त होते रहते हैं। जबकि मैं न तो कल्पना था, और न कल्पना हूँ। बल्कि कल्पनाएँ ही मुझमें पुनः पुनः उठती और विलुप्त हुआ करती हैं। और यह आत्म-साक्षात्कार कोई कल्पना नहीं, बल्कि अकाट्य स्वयंसिद्ध सत्य है। और ऐसा भी नहीं है कि मेरे संसार और मेरे समय का उद्भव पुनः पुनः होता हो। मैं ऐसी और वह / यह वास्तविकता हूँ जिसमें मैं और मेरा संसार ही पुनः पुनः प्रकट और विलुप्त होते रहते हैं। और दूसरी ओर, यह भी ऐसा ही एक और सत्य है, कि मुझे ईश्वर का यह साक्षात्कार होने से क्षण भर पहले तक भी इस सत्य की कल्पना तक मुझे नहीं थी, और इससे मैं नितान्त अनभिज्ञ ही था। और अब मुझे इस विषय में संशय नहीं है और स्पष्ट हो गया है कि आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर-साक्षात्कार एक ही साथ घटित होते हैं क्योंकि यह होने से पहले तक मैं अपने स्वयं अपनी वास्तविकता से और ईश्वर से भी अनभिज्ञ था। और अब मुझे गीता में वर्णित अध्याय ७ के श्लोक १८ -

उदाराः सर्वैवेते ज्ञानी त्वात्मैव मे मतम्।

आस्थितः स हि युक्तात्मा मामेवानुत्तमां गतिम्।।१८।।

का अभिप्राय भी समझ में आ गया है। और इसलिए, कह सकता हूँ कि 

ईश्वर-साक्षात्कार और आत्म-साक्षात्कार,

REALIZATION, SELF-REALIZATION AND GOD-REALIZATION ARE BUT ONLY ASPECTS OF ONE AND THE SAME PHENOMENON.

***


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ujjain, m.p., India
My Prominant Translation-Works Are: 1.अहं ब्रह्मास्मि - श्री निसर्गदत्त महाराज की विश्वप्रसिद्ध महाकृति "I Am That" का हिंदी अनुवाद, चेतना प्रकाशन मुम्बई, ( www.chetana.com ) से प्रकाशित "शिक्षा क्या है ?": श्री जे.कृष्णमूर्ति कृत " J.Krishnamurti: Talks with Students" Varanasi 1954 का "ईश्वर क्या है?" : "On God", दोनों पुस्तकें राजपाल संस, कश्मीरी गेट दिल्ली से प्रकाशित । इसके अतिरिक्त श्री ए.आर. नटराजन कृत, श्री रमण महर्षि के ग्रन्थों "उपदेश-सारः" एवं "सत्‌-दर्शनं" की अंग्रेज़ी टीका का हिंदी अनुवाद, जो Ramana Maharshi Centre for Learning,Bangalore से प्रकाशित हुआ है । I love Translation work. So far I have translated : I Am That (Sri Nisargadatta Maharaj's World Renowned English/Marathi/(in more than 17 + languages of the world) ...Vedanta- Classic in Hindi. J.Krishnamurti's works, : i) Ishwar Kyaa Hai, ii)Shiksha Kya Hai ? And some other Vedant-Classics. I am writing these blogs just as a hobby. It helps improve my skills and expressing-out myself. Thanks for your visit !! Contact : vinayvaidya111@gmail.com